इसरो (ISRO) ने चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5 मिशनों के डिज़ाइन को अंतिम रूप दे दिया है। चंद्रयान-4 एक महत्वपूर्ण मिशन होगा जिसमें चंद्रमा की सतह से नमूने इकट्ठे कर उन्हें पृथ्वी पर लाया जाएगा। इसे 2027 के आसपास लॉन्च करने की योजना है। इस मिशन में लैंडर, असेंडर, ट्रांसफर मॉड्यूल और री-एंट्री मॉड्यूल शामिल होंगे। लैंडर चंद्रमा की सतह पर उतरेगा, जहां एक रोबोटिक आर्म द्वारा नमूने एकत्रित किए जाएंगे, जिन्हें फिर असेंडर के जरिए चंद्रमा की कक्षा में भेजा जाएगा, और अंत में री-एंट्री मॉड्यूल के द्वारा पृथ्वी पर वापस लाया जाएगा। #chandrayan-4 #ISRO
चंद्रयान - 4 मिशन के तहत चाँद से 4-5 kg मिट्टी (soil) और चट्टानो (rocks) के नमूने पृथ्वी पर लाये जाएंगे , ताकि चंद्रमा के वातावरण का अध्धयन किया जा सके
चंद्रयान-5, जापान की अंतरिक्ष एजेंसी JAXA के साथ एक संयुक्त मिशन है। इस मिशन में एक भारतीय लैंडर और एक जापानी रोवर शामिल होगा, जो चंद्रमा के स्थायी रूप से छायादार क्षेत्रों में पानी की बर्फ की खोज करेगा।
इन मिशनों के लिए इसरो ने सरकार से मंजूरी की मांग की है, और यह मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर केंद्रित होंगे, जहां वैज्ञानिक अनुसंधान और संसाधनों की खोज की जाएगी
भारत के चंद्रयान मिशन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा चंद्रमा की खोज और अध्ययन के लिए चलाए गए अभियानों की एक श्रृंखला है। यहां इन मिशनों का विवरण दिया गया है:
### चंद्रयान-1 (2008)
- **प्रक्षेपण तिथि**: 22 अक्टूबर 2008
- **उद्देश्य**: चंद्रमा की सतह का अध्ययन, खनिजों की उपस्थिति का विश्लेषण, और पानी के अंशों की खोज।
- **प्रमुख उपलब्धि**: चंद्रयान-1 ने चंद्रमा की सतह पर पानी के अंशों की उपस्थिति का पता लगाया, जो वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण खोज थी।
- **परिणाम**: यह मिशन सफलतापूर्वक चंद्रमा की कक्षा में स्थापित हुआ और इसने एक वर्ष से अधिक समय तक काम किया। हालांकि, अगस्त 2009 में इसरो का इस मिशन से संपर्क टूट गया था।
### चंद्रयान-2 (2019)
- **प्रक्षेपण तिथि**: 22 जुलाई 2019
- **उद्देश्य**: चंद्रमा की सतह का अधिक विस्तृत अध्ययन, विशेष रूप से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र का। इसमें एक ऑर्बिटर, एक लैंडर (विक्रम) और एक रोवर (प्रज्ञान) शामिल थे।
- **प्रमुख उपलब्धि**: ऑर्बिटर अब भी चंद्रमा की कक्षा में सफलतापूर्वक कार्यरत है और महत्वपूर्ण डेटा भेज रहा है।
- **परिणाम**: लैंडर विक्रम की चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग की कोशिश असफल रही, और इसरो का उससे संपर्क टूट गया। हालांकि, ऑर्बिटर मिशन अब भी सफलतापूर्वक कार्य कर रहा है।
### चंद्रयान-3 (2023)
- **प्रक्षेपण तिथि**: 14 जुलाई 2023
- **उद्देश्य**: चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग और रोवर के माध्यम से सतह का अध्ययन। यह मिशन चंद्रयान-2 की असफलता से सीखे गए सबकों पर आधारित है।
- **प्रमुख उपलब्धि**: चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफलतापूर्वक उतरा, जिससे भारत यह उपलब्धि हासिल करने वाला चौथा देश बन गया। प्रज्ञान रोवर ने चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक अध्ययन किया।
- **परिणाम**: मिशन बेहद सफल रहा, विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर ने सफलतापूर्वक चंद्रमा की सतह का अध्ययन किया और बहुमूल्य डेटा पृथ्वी पर भेजा। यह भारत की अंतरिक्ष क्षमता के लिए एक बड़ा मील का पत्थर था।
इन मिशनों ने न केवल भारत को चंद्रमा की खोज में एक अग्रणी स्थान पर रखा, बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष अनुसंधान में भी योगदान दिया है।
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