माइक्रोप्लास्टिक मानव शरीर के विभिन्न हिस्सों में पाया गया है, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय है। वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अनुसंधानों के अनुसार, माइक्रोप्लास्टिक निम्नलिखित अंगों और हिस्सों में पाया गया है:
1. **रक्त**: हाल ही में किए गए अध्ययन में माइक्रोप्लास्टिक के कणों को मानव रक्त में पाया गया है। इसका मतलब है कि ये कण रक्त प्रवाह के माध्यम से शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँच सकते हैं।
2. **फेफड़े**: फेफड़ों में भी माइक्रोप्लास्टिक के कण पाए गए हैं। हवा के माध्यम से ये कण सांस के साथ फेफड़ों में पहुंच सकते हैं, जिससे श्वसन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
3. **अंतड़ियां**: माइक्रोप्लास्टिक के कण आहार के माध्यम से हमारे पाचन तंत्र में प्रवेश कर सकते हैं। ये कण आंतों में भी पाए गए हैं, जहां वे पाचन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं और सूजन जैसी समस्याओं का कारण बन सकते हैं।
4. **प्लेसेंटा**: गर्भवती महिलाओं की प्लेसेंटा (गर्भनाल) में भी माइक्रोप्लास्टिक पाया गया है। यह चिंता का विषय है क्योंकि यह कण गर्भ में पल रहे शिशु के विकास को प्रभावित कर सकते हैं।
5. **मल**: मानव मल में भी माइक्रोप्लास्टिक के कण पाए गए हैं। यह दर्शाता है कि ये कण हमारे आहार और पाचन तंत्र से गुजरकर बाहर निकलते हैं, लेकिन इससे पहले ये शरीर पर विभिन्न प्रभाव डाल सकते हैं।
इन अंगों में माइक्रोप्लास्टिक का पाया जाना इस बात का संकेत है कि ये कण हमारे शरीर में प्रवेश कर रहे हैं और हमारे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। वैज्ञानिक इस पर अधिक अध्ययन कर रहे हैं ताकि इसके संभावित खतरों और समाधान के उपायों का पता चल सके।
माइक्रोप्लास्टिक (Microplastic) प्लास्टिक के बहुत छोटे कण होते हैं, जिनका आकार 5 मिलीमीटर से भी कम होता है। ये छोटे-छोटे प्लास्टिक के टुकड़े हमारे पर्यावरण में विभिन्न स्रोतों से आते हैं, जैसे कि प्लास्टिक की बोतलें, बैग, कपड़े, और अन्य प्लास्टिक उत्पादों का टूटना और विखंडन। माइक्रोप्लास्टिक का मुख्य स्रोत समुद्र में मिलने वाले प्लास्टिक के कचरे का विघटन है।
### माइक्रोप्लास्टिक का प्रभाव:
1. **पर्यावरण पर प्रभाव**: माइक्रोप्लास्टिक पानी, मिट्टी, और हवा में फैल जाते हैं, जिससे जल, मृदा और वायु प्रदूषण होता है। ये जीव-जंतुओं के लिए हानिकारक हो सकते हैं, क्योंकि वे इन्हें खाना समझकर निगल सकते हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
2. **मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव**: माइक्रोप्लास्टिक का सेवन हमारे खाने-पीने के माध्यम से भी हो सकता है, जैसे समुद्री भोजन, पीने का पानी, और यहां तक कि नमक में भी माइक्रोप्लास्टिक के कण पाए गए हैं। ये कण हमारे शरीर में जाकर हानिकारक रसायनों को छोड़ सकते हैं, जो विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं।
3. **समुद्री जीवन पर प्रभाव**: समुद्री जीव, जैसे मछलियां, कछुए, और समुद्री पक्षी माइक्रोप्लास्टिक को भोजन समझकर खा लेते हैं। इससे उनकी पाचन प्रणाली में समस्या हो सकती है, जिससे उनकी मृत्यु भी हो सकती है।
### रोकथाम के उपाय:-
प्लास्टिक उत्पादों का कम उपयोग और पुनर्चक्रण।
- जैविक रूप से विघटित होने वाले उत्पादों का उपयोग।
- समुद्र और नदियों में प्लास्टिक कचरे का निपटान सही तरीके से करना।
- प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन में सुधार।
माइक्रोप्लास्टिक का हमारे पर्यावरण और स्वास्थ्य पर बहुत गंभीर प्रभाव हो सकता है, इसलिए इसके प्रति जागरूकता और उचित कदम उठाना आवश्यक है।
#IAS #currentaffairs #news #scienceandtechnology #science #medical #health #microplastic #viralnews


0 Comments